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कभी हार मत मानो

 कभी हार मत मानो 


एक लड़का जो बहुत हीं अच्छा ईमानदार था ।वह ९ कक्षा मे पड़ता था ,और अपने पिता के काम- काज मे हाथ बँटाता था ।

कुछ समय के बाद उसके पिता का व्यवसाय चलना बंद हो गया ,तो उसके पिता बहुत ज्यादा परेशान रहने लगे।

तो फिर वह अपने पिता जी की सहायता के लिये नौकरी पर जाने लगा और विद्यालय से आते ही वह काम पर चला जाता ।

उसको एक कम्प्यूटर के कंपनी मे नौकरी मिल जाती है । उसे ऑफिस बाॅय कि नौकरी मिलती है। घर की स्थिति  देख कर वह नौकारी पर जाना शुरु कर देता है । 

कुछ महीने  इसी तरह चलता रहा ,फिर एक दिन बॉस अपने बेटे को ऑफिस लाये जिसके हाथ में लैपटॉप था ,और वह सारा दिन उसमें खेलता रहता था । 

एक दिन उस लड़के ने उसके लैपटॉप को  साफ करने के लिये उसके लैपटॉप को हाथ लगाया ,तो वह स्टार्ट हो गया और बॉस क़े बेटे को यह देख गुस्सा आया और थप्पड़ मार के उससे कहां , 'इसे चलाने की तुम्हारी औकत नहीं है और तुम तो क्या तुम्हारे परीवार में भी इसे चलाने योग्य कोई नहीं ' । इतने में उसके बॉस आ जाते है और बाॅस का बेटा उसको नौकारी से निकलवा देता है ।

रोता- रोता वह मन में सोच क़े निकलता है की अब में कम्प्यूटर चलना सीख कर अपनी इस बेज्जति  का बदला लूँगा।

इतने मे एक आदमी का पर्स उसके सामने गिर जाता है , जों नोटों सें भरा होता है 

वह आदमी अपनी गाड़ी में बैठ कर चला जाता है। वह लड़का उसका पर्स उठा कर उस गाड़ी का पीछा करता है, और जब सिगनल पर कार रुकती है तो वह पर्स को लौटा देता है ।उसकी ईमानदारी देख कर वो अदमी उसको अपनी कार में बिठा कर अपने साथ ले जाता है , और परेशान होने का कारण पूछता है।  तब वह सब उस अदमी को बता देता है । वह उसके सर पे हाथ रख के पूछता है तुम बताओ 'मै तुम्हारी क्या सहायता कर सकता हूँ 'तो वह कहता है , 'मुझे लैपटॉप चलना सीखना है '

इतने मे वह आदमी उसको कम्प्यूटर सीखने का सारा खर्चा देता है ,और कहता है जल्दी सीख के मेरे पास आना फिर वह 20 घंटे वहा रह के पढ़ता है और सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन के उस अदमी के पास जाता है , तब वह व्यक्ति उसको सॉफ्टवेयर कंपनी खोलने के लिये पैसे देता है । 

1  साल बाद वो कंपनी बहुत नाम और पैसा कमाती है ओर उस जिस लड़के ने उसको काम से हटाया  था , वो उसकी कंपनी में आता है इंटरव्यू क़े लिये तब वह उस लड़के को देख चौंक जाता है,और माफी मांगने लगता है तो वो लड़का कहता है कि अगर मे आज़ जौ कुछ भी  हूँ  तुम्हारे कारण ही  हूँ ।

और उसे नौकरी पे रख लेता है ।

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