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जनवरी, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अवसर

  अवसर एक बार एक ग्राहक चित्रो की दुकान पर गया।  उसने वहाँ पर अजीब से चित्र देखे।  पहले चित्र मे चेहरा पूरी तरह बालो से ढँका हुआ था और पैरोँ मे पंख थे।  एक दूसरे चित्र मे सिर पीछे से गंजा था।  ग्राहक ने पूछा- "यह चित्र किसका है?" दुकानदार ने कहा- "अवसर का। ग्राहक ने पूछा- "इसका चेहरा बालो से ढका क्यो है?"  दुकानदार ने कहा- "क्योंकि अक्सर जब अवसर  आता है तो मनुष्य उसे पहचानता नही है। ग्राहक ने पूछा-और इसके पैरो मे पंख क्यो है?"  दुकानदार ने कहा- "वह इसलिये कि यह तुरंत वापस भाग जाता है, यदि इसका उपयोग न हो तो यह तुरंत उड़ जाता है।"  ग्राहक ने पूछा- "और यह दूसरे चित्र मे पीछे से गंजा सिर किसका है?"  दुकानदार ने कहा- "यह भी अवसर का है।  यदि अवसर को सामने से ही बालो से पकड़ लेँगे तो वह आपका है।   आपने उसे थोड़ी देरी से पकड़ने की कोशिश की तो पीछे का गंजा सिर हाथ आयेगा और वो फिसलकर निकल जायेगा।" वह ग्राहक इन चित्रो का रहस्य जानकर हैरान था पर अब वह बात समझ चुका था।  आपने कई बार दूसरो को ये कहते हुए सुना होगा या खुद भी कहा होग...

भलाई

 एक सेठ थे। उसके पास में लाखों रुपए की संपत्ति थी । बड़ी हवेली थी , देश विदेश में  कारोबार था, तिजोरीयौ में बंद पैसा था । एक दिन एक महानुभव उनसे मिलने आये।  बातचीत में उन्होंने कहा, " सेठ जी, अब तो महंगाई बेहिसाब बढ़ गई है। चीजों के दाम दोगुने हो गए हैं ।आप की संपत्ति भी अब करोड़ों रुपए की हो गई है। "सेठ ने गंभीरता से उनकी ओर देखा, बोले," मेरी संपत्ति करोड़ों रुपए की!"  उन महानुभव ने मुस्कुरा कर कहा , "सेठ जी , आप घबराइए नहीं मैं राजस्व विभाग का आदमी नहीं हूं। मैंने तो सहज भाव से कह दिया था कि चीजों के दाम बढ़े हैं तो आप की जमीन जायदाद के दाम भी बढ़ गए होंगे ।"  सेठ बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के आदमी थे।   उन्होंने कहा, " मेरी संपत्ति है कहां!  जिसे तुम मेरी संपत्ति कहते हो,  मेरी कहां है ? जिसे मैंने दूसरों की भलाई के लिए खर्च किया, वह मेरी थी । अब जो बची है ,उसका मैं स्वामी नहीं ।  वह समाज की है उसमें से मैं जितना पदार्थ खर्च करूंगा,  वह मेरी हो जाएगी।" महानुभाव आगे कुछ नहीं कह सका। सेठ जी ने जो कुछ कहा था,  वह कहने को नहीं कह...

2000 रूपए का नोट

 एक बार एक प्रसिद्ध वक्ता किसी शहर में आये हुए थे, और सैंकड़ो लोग उस वक्ता को सुनने आये थे, वक्ता अपने दर्शकों के सामने एक 2000  रूपए का नोट अपने हाथ में लिए हुए थे। उसने उस 2000 रूपए के नोट को सभी को दिखाते हुए सभी से पूछा- “कौन कौन इस नोट को पाना चाहता है?” सभी ने हाँ में जवाब दिया। उस वक्ता ने कहा मैं आप मे से एक को यह नोट दूँगा, ऐसा कह कर उसने उस नोट को मरोड़ दिया। उसने पूछा- “अब कौन इसे अभी भी पाना चाहेगा?” अभी भी लगभग सभी लोगों ने हाथ खड़े थे। उसने फिर उस नोट को लेकर अपने जूतों से अच्छे से रगड़ दिया और गंदा कर दिया। उसने उस नोट को उठाया और फिर उसको भीड़ के समक्ष दिखा कर दोबारा पूछा- “अब कौन कौन इसे अभी भी चाहता है”, क्योंकि अब की बार यह गन्दा और मरोड़ा हुआ था। अभी भी  सभी ने अपने हाथ खड़े किये। यह देख कर वक्ता ने भीड़ को सम्बोद्धित करते हुए कहा की मैंने इस नोट के साथ जाने क्या क्या किया लेकिन फिर भी आप सब इसे पाना चाहते हो, क्योंकि लाख मरोड़ने पर भी इसके मूल्य में परिवर्तन नही आया, अभी भी इसकी कीमत 2000 रूपए ही है।